आयुर्वेदिक दवा से कुछ इस तरह दूर किया जा सकता है कोहनी का दर्द

कोहनी दर्द

परंपरागत उपचार माध्यम आयुर्वेद, दुनिया की ऐसी उपचार विधा है जो पूरी तरह प्राकृतिक जड़ी बूटियों पर आधारित होती है। कोहनी दर्द में आयुर्वेदिक दवा एक ऐसा उपाय है जिसके फायदे तो बहुत हैं लेकिन नुकसान के नाम पर शायद कुछ भी नही। हलांकि दुनिया की हर उपचार पद्धतियों की अपनी कुछ विसंगतियां भी होती हैं लेकिन आयुर्वेद हड्डियों संबंधित रोग में बेहद कारगर साबित हुआ है। सदियों या फिर यूं कहें कि हजारों सालों से हमारे पूर्वज इस पद्धति का प्रयोग अनेक असाध्य रोगों के लिए भी करते आ रहे हैं। कोहनी रोग या फिर इससे जुड़ी परेशानी की कई वजहें होती हैं। मसलन कई बार खिलाड़ी या फिर मकैनिक जब अपनी दिनचर्या का एक बड़ा हिस्सा शारीरिक श्रम करने में बिता देता है तब उसकी मांसपेशियों में खिंचाव आना लाजमी है। मांसपेशियों में तनाव सहित ऊर्जा और रक्त संचार की कमी होने के चलते कई बार मांसपेशियों में सुन्नता हो जाती है। इन तरह से कोहनी में समस्या बढ़ जाती है।

खान पान की विसंगतियों के अलावा जीवनशैली में लगातार परिवर्तन के साथ लगातार बढ़ता प्रदूषण भी हड्डियों का दुश्मन माना जाता है। वैसे तो इस तरह की समस्या में राहत पाने के कई उपाय मौजूद होते हैं लेकिन आयुर्वेद की दवा ऐसे रोगों में बेहद कारगर होती है। इस लेख के माध्यम से इस बात पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे कि किस तरह से कोहनी की समस्या दूर करने में आयुर्वेदिक दवा काम करती है। साथ ही इस तरह की दवाओं की जटिलताओं संबंधित जरूरी जानकारी के लिए भी चर्चा की जाएगी।

कोहनी दर्द में आयुर्वेदिक दवा के फायदे

कोहनी दर्द में आयुर्वेदिक दवा के लिए कई महान आयुर्वेदाचार्यों द्वारा लिखी पुस्तकों में वर्णित संहिताओं से कई तरह की दवाओं के इस्तेमाल और उनके बनाने की विधि के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। हमारी प्रकृति बेहद रचनात्मक होती है। इसमें मौजूद जड़ी बूटियों से तैयार दवाएं लाभ पहुंचाती हैं। अशोक की छाल से तैयार दवा दर्द निवारक मानी जाती है। इसके अलावा लहसुन से बनी दवा का सेवन भी आयुर्वेद में काफी किया जाता है। अदरक के अर्क से तैयार आयुर्वेदिक दवा का प्रयोग दर्द के लिए व्यापक पैमाने पर किया जाता है। आयुर्वेद में मर्ज और मरीज की उम्र सहित मौके पर स्थिति का आंकलन करते हुए दवाओं के सेवन की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेदिक दवाओं का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि इनका शरीर और किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट होते नही देखा जाता। हड्डियों या फिर कोहनी दर्द में कई बार वैद मरीज की नाड़ियों को छूकर या फिर पकड़ कर मर्ज कितना गहराई तक असर डाल चुका है इसका आकलन करते हैं। हालांकि इस विधा के अलावा आधुनिक दौर में तकनीक की मदद से मर्ज का सटीक पता लगाकर इस विधा से उपचार करने की पद्धति का तेजी से विकास हुआ है। प्रकृति में मौजूद तत्वों मसलन एलोवेरा, नीम सहित तुलसी के पत्तों के साथ कई अन्य दुर्लभ जड़ी बूटियों के मिश्रण से तैयार दवाएं शरीर के लिए रामबाण उपचार का काम करती हैं। खास बात यह है कि इन दवाओं का शरीर पर तेजी से असर होता हुआ देखा गया है। एक अंतरराष्ट्रीय हेल्थ सर्वे के मुताबिक रोगों में साइड इफेक्ट कम करने के लिए मरीज बहुतायत से आयुर्वेदिक इलाज की तरफ अग्रसर हो रहे हैं। आज के दौर में कई भारतीय संस्थान आयुर्वेदिक दवाओं के लिए रोगों से लड़ने की नई तकनीक विकसित करने में लगे हैं। हड्डियों से संबंधित रोगों से सुरक्षा के लिए नित नए शोधो के फलस्वरूप तकनीक युक्त दवाएं मरीज को काफी लाभ पहुंचाती हैं।

कोहनी दर्द में आयुर्वेदिक दवा संबंधित जटिलताएं

कोहनी में दर्द के दौरान तुरंत राहत देने वाली दवाओं के लिए एलोपैथी के अलावा दुनिया मे कोई अन्य उपाय नही होते। हालांकि कुछ मामलों में आयुर्वेदिक दवाओं का असर कुछ देर बाद हो जाता है। आज के दौर में कई संस्थान आयुर्वेदिक के साथ एलोपैथिक दवाओं का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं जो किसी भी रूप में सेहत के लिए लाभकारी नही होता। आयुर्वेद में लंबे उपचार के बाद ही मर्ज ठीक हो पाती है। इसके अलावा मिलावटी दवाओं के कारण कई बार शरीर को साइड इफेक्ट का सामना भी करना पड़ता है। यदि जड़ी बूटियों की बात करें तो लोगों को इससे स्थाई समाधान तो मिलता है लेकिन कई तरह के परहेजों के कारण लोग इस तरह की पद्वतियों का सही से लाभ नही उठा पाते और रोग को जड़ से ठीक कर पाने में वंचित रह जाते हैं। इस तरह से कोहनी संबंधित रोगों में आयुर्वेदिक दवा की कई विसंगतियां होती हैं जिनकी जटिलताओं के चलते मरीज को अक्सर नुकसान पहुंच जाता है।

कोहनी दर्द में आयुर्वेद दवाओं संबंधित जरूरी सुझाव

वैसे तो कोहनी दर्द में आयुर्वेदिक दवा किसी भी तरह का नुकसान ना पहुंचाकर लाभ ही देती है। दवाओं के सेवन की मात्रा समय और उसका स्वरूप मरीज जी मौजूदा स्थिति पर निर्भर करता है। मरीज की हड्डियों में संक्रमण के दौरान उम्र के हिसाब से दवाओं के सेवन की सलाह सटीक रूप से समझ कर ही सेवन करना चाहिए। याद रहे आयुर्वेदिक दवाओं का होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति के साथ प्रयोग करना शरीर के लिए बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। जब भी दवा का इस्तेमाल करें अपने चिकित्सक से दवा की मात्रा के बारे में जरूर पूछ या जान लें। इन दवाओं के साथ परहेज करना उत्तम माना जाता है। खासकर खट्टी और लाल मिर्च के परहेज के साथ ही आयुर्वेदिक दवाओं का असर शरीर पर अनुकूल होता है।

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